झारखंड: तीन वर्षों में 412 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थ जब्त, फिर भी सक्रिय है तस्करी का नेटवर्क

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रांची: झारखंड में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध खेती पर रोक लगाने के लिए पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। इसके बावजूद नशे का अवैध कारोबार सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में एनडीपीएस एक्ट के तहत 609 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या 464 और 2023 में 537 रही। वर्ष 2024 में मामले बढ़कर 804 हो गए, जबकि 2025 में 782 मामले दर्ज किए गए।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में 1,062 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 2025 में 994 गिरफ्तारियां हुईं। पिछले तीन वर्षों के दौरान पुलिस और एनसीबी की संयुक्त कार्रवाई में गांजा, अफीम, डोडा समेत अन्य मादक पदार्थों की 412 करोड़ रुपये से अधिक की खेप जब्त की गई। इसके बावजूद तस्करी का नेटवर्क सक्रिय रहने से बड़े तस्करों और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचने की चुनौती बनी हुई है।

तस्करी और अवैध खेती पर नियंत्रण के लिए सीआईडी के स्तर पर राज्यस्तरीय एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की गई है। डीजीपी तदाशा मिश्रा के अनुसार, नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सीआईडी में अलग विंग बनाया गया है। उन्होंने बताया कि अफीम की अवैध खेती के खिलाफ अभियान में हजारों एकड़ में लगी फसल नष्ट की गई है और संबंधित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

राज्य के कई जिले मादक पदार्थों की तस्करी की समस्या से प्रभावित हैं। रांची में ब्राउन शुगर, सिंथेटिक ड्रग्स और नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले सामने आते रहे हैं। वहीं, चतरा और लातेहार में अफीम व डोडा की अवैध खेती तथा तस्करी चिंता का विषय है। हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, खूंटी, देवघर, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हुए हैं। नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए तस्करी के नेटवर्क और अवैध आपूर्ति श्रृंखला पर कार्रवाई को अहम माना जा रहा है।