रांची: झारखंड के हजारों विद्यार्थियों को अब इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों या दूर-दराज के स्कूलों का रुख नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने 765 विद्यालयों को प्लस-टू स्तर पर उत्क्रमित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। चयनित विद्यालयों में अगले शैक्षणिक सत्र से 11वीं और 12वीं कक्षाओं की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी की जा रही है।


शिक्षा विभाग द्वारा जिलों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के बाद उन विद्यालयों का चयन किया गया है, जहां कम से कम एक एकड़ भूमि उपलब्ध है और आसपास प्लस-टू स्तर की शिक्षा सुविधा नहीं है। चयन प्रक्रिया में पंचायत क्षेत्रों, शहरी वार्डों और दूरस्थ इलाकों के विद्यालयों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
सरकार का मानना है कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। वर्तमान में प्रति दस लाख आबादी पर प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की संख्या 106 है, जबकि हाई स्कूल और प्लस-टू विद्यालयों की संख्या मात्र आठ है।
उत्क्रमित किए जाने वाले विद्यालयों में 449 हाई स्कूल और 316 मध्य विद्यालय शामिल हैं। प्रत्येक विद्यालय में प्राचार्य सहित 12 पद सृजित किए जाएंगे। आवश्यकता के अनुसार 13 अतिरिक्त विषयवार शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।
सरकार को उम्मीद है कि इस निर्णय से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही इंटर स्तर की शिक्षा उपलब्ध होगी और स्कूल छोड़ने की दर में कमी आएगी।

