झारखंड के पलामू जिले में सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्यों के लिए जारी राशि का वर्षों से हिसाब नहीं देने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिले के 22 नए प्राथमिक और उत्क्रमित मध्य विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापक-सह-सचिवों पर वित्तीय अनियमितता के आरोपों को लेकर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जिला शिक्षा पदाधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम पदाधिकारी Saurabh Prakash ने संबंधित विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापकों को एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं करने पर प्राथमिकी दर्ज करने की चेतावनी भी दी गई है। मामला वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2012-13 के बीच सर्व शिक्षा अभियान के तहत विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष और शौचालय निर्माण के लिए जारी की गई राशि से जुड़ा है। विभागीय जांच में पाया गया कि लगभग 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी करीब 77 लाख रुपये का समायोजन नहीं हो सका है। आरोप है कि कई विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापक-सह-सचिव और ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्षों ने राशि की निकासी कर ली, लेकिन निर्माण कार्य अधूरे रह गए। कुछ विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष और शौचालय आज तक पूरे नहीं हुए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कार्य शुरू भी नहीं हुआ। शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित प्रभारी प्रधानाध्यापकों का मानदेय रोक दिया है और स्पष्ट किया है कि बकाया राशि जमा करने का प्रमाण प्रस्तुत किए बिना भुगतान जारी नहीं किया जाएगा। इस मामले ने सरकारी विद्यालयों में विकास योजनाओं की निगरानी और वित्तीय जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब विभाग की कार्रवाई के बाद बकाया राशि की वसूली और जिम्मेदार लोगों पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।



