जमशेदपुर: टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के उत्पादन और बिक्री के आंकड़े जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस अवधि में 5.82 मिलियन टन कच्चे इस्पात (क्रूड स्टील) का उत्पादन और 5.17 मिलियन टन स्टील की डिलीवरी दर्ज की। जमशेदपुर और कलिंगनगर संयंत्रों में उत्पादन बढ़ने से कंपनी के क्रूड स्टील उत्पादन में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, बेहतर उत्पाद मिश्रण और मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क के चलते घरेलू डिलीवरी में भी 11 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।


ऑटोमोटिव और स्पेशल प्रोडक्ट्स वर्टिकल ने 0.9 मिलियन टन के साथ पहली तिमाही का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। कलिंगनगर की कंटीन्यूअस एनीलिंग और गैल्वेनाइजिंग लाइन की क्षमता बढ़ने से हाई-एंड उत्पादों की बिक्री में 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई। ब्रांडेड प्रोडक्ट्स और रिटेल वर्टिकल ने 1.7 मिलियन टन का रिकॉर्ड वॉल्यूम हासिल किया। टाटा टिस्कॉन की बिक्री में 33 प्रतिशत और टाटा स्टीलियम की बिक्री में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स एंड प्रोजेक्ट्स वर्टिकल ने 1.6 मिलियन टन का कारोबार किया। कंपनी शिपबिल्डिंग, कंटेनर और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों में नए ग्राहकों को जोड़कर अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। ट्यूब, टिनप्लेट, वायर और कलर सेगमेंट ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। ट्यूब और टिनप्लेट कारोबार ने पहली तिमाही में अब तक का सर्वश्रेष्ठ वॉल्यूम दर्ज किया। कंपनी के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म टाटा स्टील आशियाना और डिजेका का कुल ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू 2,200 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 61 प्रतिशत अधिक है।
नीदरलैंड्स इकाई में पहली तिमाही के दौरान 1.55 मिलियन टन लिक्विड स्टील का उत्पादन और 1.40 मिलियन टन की डिलीवरी दर्ज की गई। हालांकि अप्रैल 2026 में डायरेक्ट शीट प्लांट बंद रहने से उत्पादन और बिक्री प्रभावित रही। वहीं, टाटा स्टील यूके ने खरीदे गए सब्सट्रेट की डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग के जरिए ग्राहकों को सेवा जारी रखते हुए 0.48 मिलियन टन की डिलीवरी की। पोर्ट टैलबोट में 3 एमटीपीए इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस लगाने का कार्य भी प्रगति पर है।
टाटा स्टील थाईलैंड ने पहली तिमाही में 0.33 मिलियन टन बिक्री योग्य इस्पात का उत्पादन और समान मात्रा में डिलीवरी दर्ज की। कंपनी का कहना है कि मूल्यवर्धित उत्पादों पर फोकस, नई औद्योगिक श्रेणियों में विस्तार और मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रणनीति भविष्य में भी विकास को गति देगी।

