सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के कालीचमड़ा गांव में पिछले 10 दिनों से डेरा जमाए जंगली हाथी को आखिरकार सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ दिया गया। हाथी के लगातार गांव में उत्पात मचाने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। शाम होते ही लोग घरों से बाहर निकलने से कतराते थे, जबकि कई परिवार रात के समय सुरक्षा के लिए पास के स्कूल की छत पर शरण लेने को मजबूर थे।


वन विभाग की टीम, क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से हाथी को सुरक्षित जंगल तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया। झारखंड की टीम के साथ पश्चिम बंगाल के झालदा क्षेत्र के हेसला और चौका की क्रेडल QRT टीम के करीब 20 सदस्य भी अभियान में शामिल रहे। पूरी रात मशाल, टॉर्च और अन्य संसाधनों की मदद से हाथी को गांव से बाहर निकालने का प्रयास किया गया।
वन विभाग के वनपाल प्रभारी कैलाश महतो, मुन्ना सिंह, सुरेंद्र कुमार गोप तथा प्रधान वन रक्षी रामचरण महतो, भगवत टुडू और गणेश किस्कू ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अभियान का नेतृत्व किया। लगातार प्रयासों के बाद शनिवार तड़के हाथी को सुरक्षित रूप से सालबनी जंगल की ओर भेज दिया गया।
वनपाल प्रभारी कैलाश महतो ने बताया कि इस अभियान में मतकमडी, बुरुहातु, कड़क, लोपसोडीह सहित आसपास के गांवों के 500 से अधिक ग्रामीणों ने सहयोग किया। उन्होंने ग्रामीणों और दोनों राज्यों की QRT टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में इसी तरह का सहयोग आवश्यक होगा।

