
उपायुक्त ने कहा कि PESA (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों में) अधिनियम आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाकर स्थानीय संसाधनों और विकास योजनाओं में समुदाय की भूमिका को और मजबूत किया जा सकता है।


जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि PESA अधिनियम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना और उनकी पारंपरिक व्यवस्थाओं को संरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं को अपने अधिकारों और दायित्वों की पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि वे प्रभावी रूप से अपनी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में PESA अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर संचालित विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समुदायों को PESA अधिनियम के प्रावधानों और उनके अधिकारों की अधिकतम जानकारी दी जानी चाहिए। इसके लिए गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने और ग्राम सभाओं को सक्रिय करने पर जोर दिया गया।
उपायुक्त ने कहा कि क्षेत्र का समग्र और सतत विकास तभी संभव है जब स्थानीय समुदाय विकास योजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से PESA अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन करने और लोगों को जागरूक करने की अपील की।

