कोलकाता :भारत-बांग्लादेश सीमा पर चल रहे ‘ऑपरेशन पुशबैक’ का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। अवैध प्रवासियों और कथित घुसपैठियों को वापस भेजने की कार्रवाई के बीच कई लोगों के नो-मैन्स लैंड और जीरो प्वाइंट में फंस जाने से स्थिति जटिल हो गई है। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल (बीजीबी) कई मामलों में ऐसे लोगों को स्वीकार नहीं कर रहा है, जिसके कारण वे दोनों देशों के बीच फंसे हुए हैं।


सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, आठ से 10 जून के बीच करीब 20 लोगों को सीमा पार भेजने की कोशिश की गई थी, लेकिन उन्हें बांग्लादेश में प्रवेश नहीं मिल सका। वहीं जलपाईगुड़ी के बेरुबाड़ी क्षेत्र में 10 बांग्लादेशी नागरिक, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे, कई दिनों तक नो-मैन्स लैंड में फंसे रहे। बाद में उन्हें मानवीय आधार पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
राज्य के विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में 400 से अधिक लोगों को रखा गया है। सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच बीएसएफ और बीजीबी दोनों ने सतर्कता बढ़ा दी है। बांग्लादेश ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई है, जबकि भारत का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। दोनों देशों के बीच इस विषय पर बातचीत भी चल रही है।

