रांची: देशभर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में मई महीने के दौरान लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र और राज्य सरकारें आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक गतिविधियों की धीमी गति और कुछ प्रमुख क्षेत्रों में मांग में कमी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।


झारखंड के लिए स्थिति अधिक चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि राज्य में GST संग्रह की ग्रोथ रेट शून्य (Zero Growth) दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि पिछले वर्ष की तुलना में राज्य के GST संग्रह में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। खनिज संसाधनों से समृद्ध झारखंड के लिए यह आंकड़ा वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार औद्योगिक गतिविधियों में अपेक्षित वृद्धि नहीं होना, खनन और स्टील सेक्टर में मांग की सुस्ती, व्यापारिक लेन-देन में कमी तथा टैक्स अनुपालन से जुड़ी चुनौतियां GST संग्रह को प्रभावित कर रही हैं।
GST से प्राप्त राजस्व का उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास योजनाओं के संचालन में किया जाता है। ऐसे में राजस्व वृद्धि नहीं होने से सरकार के सामने वित्तीय प्रबंधन की चुनौती बढ़ सकती है। फिलहाल आम लोगों पर इसका सीधा असर नहीं दिख रहा है, लेकिन आर्थिक गतिविधियों में लगातार सुस्ती रहने पर रोजगार, निवेश और विकास परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने उद्योग और व्यापार को प्रोत्साहन देकर GST संग्रह में सुधार की आवश्यकता बताई है।

