सरायकेला: सरायकेला डीसी कार्यालय के समीप बुधवार को सड़क दुर्घटना में सहायक शिक्षिका सुलेखा महतो की मौत के बाद मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया है। घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और विद्यालय आवंटन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं।


जानकारी के अनुसार सुलेखा महतो को नियुक्ति मिलने के लगभग चार महीने बाद भी किसी विद्यालय में पदस्थापित नहीं किया गया था। जबकि इसी अवधि में नियुक्त अधिकांश सहायक शिक्षकों को विद्यालय आवंटित कर दिया गया था। विद्यालय नहीं मिलने के कारण उन्हें नियमित रूप से चाईबासा से सरायकेला स्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय आकर उपस्थिति दर्ज करनी पड़ती थी।
बताया जा रहा है कि बुधवार को भी वह आवश्यक कार्यालयी कार्यों के लिए डीईओ कार्यालय पहुंची थीं। काम पूरा कर परिवार के साथ लौटने के दौरान डीसी कार्यालय के समीप एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय आवंटन में चार महीने की देरी क्यों हुई, इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, शिक्षिका की मौत के बाद प्रशासनिक जवाबदेही और लंबित विद्यालय आवंटन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

