रांची: झारखंड सरकार ने स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से विशेष नामांकन अभियान SETENG-2026 शुरू किया है। झारखंड शिक्षा परियोजना के इस अभियान के तहत 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों की पहचान की जाएगी, जो कभी स्कूल नहीं गए, पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं या किसी कारणवश शिक्षा से दूर हैं। यह अभियान 7 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक चलेगा।


अभियान की शुरुआत डिजिटल मैपिंग से होगी। राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों को 13 जुलाई तक DAHAR 2.0 ऐप पर Habitation Mapping और Worksite Tagging का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके माध्यम से ऐसे क्षेत्रों और कार्यस्थलों की पहचान की जाएगी, जहां शिक्षा से वंचित बच्चों के मिलने की संभावना अधिक है।
इसके बाद 14 जुलाई से 16 अगस्त तक चिन्हित 112 विद्यालयों के शिक्षक, सहायक शिक्षक, बीआरपी, सीआरपी, मातृ समिति और विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्य घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस दौरान स्कूल में पढ़ रहे, पढ़ाई छोड़ चुके तथा कभी नामांकन नहीं कराने वाले बच्चों का पूरा विवरण एकत्र कर DAHAR 2.0 ऐप पर अपलोड किया जाएगा।
यह अभियान केवल गांवों और मोहल्लों तक सीमित नहीं रहेगा। सर्वे दल रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल, ढाबा, ईंट-भट्ठों और अन्य कार्यस्थलों पर भी पहुंचेगा। वहां रहने या काम करने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
झारखंड शिक्षा परियोजना ने सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों को U-DISE+ पोर्टल पर दर्ज ड्रॉपआउट बच्चों का सत्यापन करने का निर्देश दिया है। साथ ही NIOS के माध्यम से पढ़ाई कर रहे बच्चों की सूची 28 अगस्त तक जिला परियोजना कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी।
शिक्षा विभाग के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। सर्वे पूरा होने के बाद चिन्हित बच्चों का नामांकन कराया जाएगा और उन्हें पुनः विद्यालयों से जोड़ा जाएगा।

