सरायकेला (संजीव मेहता): बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी में दो युवकों पर हुए जानलेवा हमले और हिमांशु सिंह की मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) तक पहुंच गया है। आयोग ने इस मामले में दायर शिकायत को स्वीकार करते हुए डायरी संख्या 15568/IN/2026 जारी कर दी है। शिकायत दर्ज होने के साथ ही मामले ने मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही के मुद्दे पर नया मोड़ ले लिया है।


यह शिकायत झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) के प्रमुख मनोज मिश्रा की ओर से एनएचआरसी को भेजी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिष्टुपुर में पुलिस वैन से दो युवकों को अपराधियों ने खींचकर बेरहमी से हमला किया, जिसमें गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक प्रत्युश अब भी अस्पताल में उपचाराधीन है।
शिकायत में कहा गया है कि यदि पुलिस की मौजूदगी या अभिरक्षा में किसी नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। इस आधार पर पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग
मनोज मिश्रा ने शिकायत में केवल हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि घटना के दौरान कथित लापरवाही बरतने वाले संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
शिकायत में मृतक हिमांशु सिंह के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा घायल प्रत्युश के समुचित इलाज और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए यह आवश्यक कदम है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा शिकायत स्वीकार किए जाने के बाद अब सभी की निगाहें आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग झारखंड सरकार और पुलिस प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब करता है, तो यह मामला कानून-व्यवस्था, पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के दृष्टिकोण से राज्य में महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है। वहीं, पीड़ित परिवार और मानवाधिकार संगठनों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के माध्यम से दोषियों के साथ-साथ किसी भी स्तर की लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होगी।

