रांची: झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। झारखंड स्टेट एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने मौजूदा टेंडर प्रक्रिया का विरोध करते हुए सरकार को 8 सितंबर तक का समय दिया है। संघ का कहना है कि इस अवधि में टेंडर रद्द नहीं किया गया तो राज्यभर के 108 एंबुलेंस कर्मचारी आंदोलन शुरू कर सकते हैं।


कर्मचारी संघ की प्रमुख मांग है कि 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन निजी एजेंसी के बजाय सरकारी व्यवस्था के तहत किया जाए। संघ चाहता है कि प्रत्येक जिले में सिविल सर्जन की निगरानी में एंबुलेंस सेवा संचालित हो। राज्य अध्यक्ष नीरज तिवारी के अनुसार, नेशनल हेल्थ मिशन की ओर से भी इस तरह की व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए गए हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है।
संघ ने निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित व्यवस्था में एंबुलेंस के रखरखाव, ईंधन और कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी समस्याओं का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं में गड़बड़ी का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली आपातकालीन सेवा पर पड़ सकता है।
संघ का दावा है कि सरकारी स्तर पर संचालन होने से सेवा की सीधी निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी, कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा होगी और खर्च को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। फिलहाल संघ ने 8 सितंबर तक कार्रवाई की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर राज्यभर में आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

