नई दिल्ली: मनरेगा श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। जिन श्रमिकों का अभी तक E-KYC पूरा नहीं हुआ है, उन्हें केवल इसी वजह से रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि E-KYC रोजगार पाने की अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि कोई श्रमिक रोजगार की मांग करता है, तो केवल E-KYC लंबित होने के आधार पर उसकी मांग को खारिज नहीं किया जा सकता।


सरकार के अनुसार, E-KYC का उद्देश्य श्रमिकों की पहचान और रिकॉर्ड को सही तरीके से दर्ज करना है। इसका रोजगार मांगने के कानूनी अधिकार से कोई सीधा संबंध नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 15.89 करोड़ श्रमिकों का E-KYC पूरा हो चुका है। इनमें 10.84 करोड़ सक्रिय श्रमिक हैं और 10.27 करोड़ सक्रिय श्रमिकों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। यानी करीब 95 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का E-KYC हो चुका है। सरकार के अनुसार सामान्य स्थिति में यह प्रक्रिया 30 सेकंड से भी कम समय में पूरी हो सकती है।
मंत्रालय ने बताया कि मनरेगा में पंजीकृत श्रमिकों को अब विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G के तहत स्थानांतरित किया गया है। यह प्रक्रिया E-KYC की स्थिति पर निर्भर नहीं है।
सरकार के अनुसार करीब 2.11 करोड़ श्रमिकों ने VB-G RAM G के तहत रोजगार की मांग की है और उन्हें काम उपलब्ध कराने की पेशकश की गई है। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सक्रिय श्रमिकों का E-KYC जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सत्यापन में देरी को रोजगार से इनकार का आधार नहीं बनाया जाएगा।

