चांडिल की कोहिनूर पावर के 290 करोड़ रुपये के ऋण मामले में ईडी की छापेमारी, सीए और सहयोगियों के ठिकानों से दस्तावेज जब्त

Spread the love

जमशेदपुर: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े करीब 290 करोड़ रुपये के बैंक ऋण मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच तेज कर दी है। शुक्रवार सुबह ईडी की टीम ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा, हुगली के उत्तरपाड़ा, लेक टाउन और आसनसोल में कोहिनूर ग्रुप के चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वित्तीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

मामला चांडिल थाना क्षेत्र के कुचिडीह गांव में स्थित कंपनी से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने 66 मेगावाट क्षमता का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के नाम पर बैंकों से करीब 290 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, लेकिन इस रकम का इस्तेमाल निर्धारित परियोजना में करने के बजाय ग्रुप की 100 से अधिक कथित शेल कंपनियों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। जांच में प्रमोटरों पर इस राशि से निजी संपत्तियां खरीदने और व्यक्तिगत खर्च करने के आरोप भी सामने आए हैं।

जानकारी के अनुसार, कोहिनूर ग्रुप ने 2005 में झारखंड सरकार के साथ एमओयू किया था। वर्ष 2008 से 2013 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने कंपनी को 290 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट सुविधा मंजूर की थी। हालांकि, पावर प्लांट वर्ष 2016 तक पूरा नहीं हो सका और कंपनी का बैंक खाता 2015 में ही एनपीए घोषित कर दिया गया था।

जांच के अनुसार, प्रमोटर विजय बोथरा, प्रशांत बोथरा और उनके परिजनों के नाम पर कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में संपत्तियां खरीदे जाने की बात सामने आई है। इन संपत्तियों से करीब 26 लाख रुपये मासिक किराया मिलने का दावा किया गया है। वर्ष 2018 में एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई और 2019 में लिक्विडेशन के दौरान बैंकों को लगभग सात करोड़ रुपये ही मिले।

फिलहाल ईडी कथित मनी ट्रेल और संपत्तियों से जुड़े लेन-देन की जांच कर रही है। आदित्यपुर के आशियाना ट्रेड सेंटर स्थित कंपनी का कार्यालय और चांडिल का प्लांट लंबे समय से बंद बताए जा रहे हैं। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई हो सकती है।