नक्सलवाद पर बड़ी सफलता का दावा, देश लगभग हुआ नक्सल प्रभाव से मुक्त

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रांची: देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए लंबे समय से चुनौती बने नक्सलवाद को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ी उपलब्धि का दावा किया है। सरकार के अनुसार 31 मार्च 2026 तक देश को लगभग पूरी तरह नक्सल प्रभाव से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। सुरक्षा अभियानों, विकास योजनाओं और पुनर्वास कार्यक्रमों के संयुक्त प्रयासों को इस सफलता का प्रमुख आधार बताया गया है।

नक्सल आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र से हुई थी। समय के साथ यह कई राज्यों तक फैल गया और 2004 में सीपीआई (माओवादी) के गठन के बाद इसकी गतिविधियां और संगठित हो गईं। हालांकि वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार ने नक्सलवाद से निपटने के लिए व्यापक रणनीति पर काम शुरू किया।

वर्ष 2015 में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना लागू की गई। इसके तहत केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ाने के लिए नए पुलिस कैंप, सुदृढ़ थाने, सड़कें, हेलिपैड और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए।

कोबरा, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर, ग्रेहाउंड्स सहित विभिन्न सुरक्षा बलों ने समन्वित अभियान चलाकर नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया। कई बड़े ऑपरेशनों में शीर्ष माओवादी नेताओं को निष्क्रिय किया गया तथा उनके आर्थिक स्रोतों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई।

सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए विशेष पुनर्वास नीति लागू की, जिसके तहत आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान किए गए। वहीं शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार योजनाओं के जरिए हजारों युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा गया।

सरकार का दावा है कि सुरक्षा, विकास और पुनर्वास की त्रिस्तरीय रणनीति के कारण नक्सलवाद पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित करने में सफलता मिली है।