सरायकेला-खरसावां (चांडिल): चांडिल में अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और NH-32 पर फ्लाईओवर निर्माण की योजनाओं के बीच दलमा इको सेंसिटिव जोन (ESZ) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर विकास कार्यों को लेकर उत्साह है, तो दूसरी ओर ESZ नियमों और हाथी कॉरिडोर के संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा चांडिल स्टेशन को हाईटेक बनाने की घोषणा के साथ ही फ्लाईओवर परियोजनाओं को वन विभाग से NOC मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, कुछ महीने पहले जारी ESZ अधिसूचना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी थी, जिसमें निर्माण कार्यों पर नियंत्रण की चेतावनी दी गई थी।
हाथी कॉरिडोर बना बड़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, चांडिल स्टेशन के पास NH-32 क्षेत्र पारंपरिक हाथी कॉरिडोर है। रेलवे यार्ड में कोयले का परिचालन, बढ़ता ट्रैफिक और शोर के कारण यह रास्ता बाधित हो गया है। नतीजतन हाथियों का झुंड अब दूसरे रास्तों की ओर जा रहा है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष और दुर्घटनाओं के मामले बढ़े हैं।
विकास और नियमों के बीच टकराव
ESZ नियमों के तहत नए निर्माण, उद्योग और बड़े प्रोजेक्ट्स पर प्रतिबंध या नियंत्रण है। ऐसे में स्टेशन विस्तार, सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर निर्माण जैसे प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोग सरकार से स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं, ताकि पुराने बसे लोगों को परेशानी न हो।
समाधान की तलाश
वन विभाग और विशेषज्ञों का सुझाव है कि हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के लिए अंडरपास या एलिवेटेड रोड जैसे विकल्प अपनाए जाएं। रेलवे और NHAI का कहना है कि सभी परियोजनाएं पर्यावरणीय मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेंगी।

