जमशेदपुर: ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। लॉन्जेविटी एक्सपर्ट डॉ. सुमन रौशन ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के माध्यम से लिपोप्रोटीन(a), यानी Lp(a), के बारे में जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, खून में इस लिपोप्रोटीन का स्तर अधिक होने पर हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। यह धमनियों में प्लाक जमने और रक्त के थक्के बनने जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।


डॉ. सुमन रौशन के मुताबिक, Lp(a) का स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से प्रभावित होता है। यदि माता-पिता या भाई-बहन में इसका स्तर अधिक है, तो परिवार के अन्य सदस्यों में भी इसके बढ़े होने की आशंका रहती है। यह स्थिति केवल अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है। फिट रहने वाले, नियमित जिम जाने वाले और शाकाहारी भोजन करने वाले लोगों में भी Lp(a) का स्तर बढ़ा हो सकता है।
सामान्य लिपिड प्रोफाइल जांच में Lp(a) का स्तर शामिल नहीं होता। इसलिए डॉक्टर ने जीवन में कम से कम एक बार इसकी जांच कराने पर विचार करने की सलाह दी है। आमतौर पर 30 mg/dL से कम स्तर को कम जोखिम वाला माना जाता है, जबकि 50 mg/dL या उससे अधिक स्तर हृदय संबंधी जोखिम बढ़ने से जुड़ा है। हालांकि, रिपोर्ट की व्याख्या व्यक्ति की अन्य स्वास्थ्य स्थितियों और चिकित्सकीय इतिहास के आधार पर की जानी चाहिए।
डॉ. रौशन के अनुसार, Lp(a) का स्तर अधिक होने पर LDL कोलेस्ट्रॉल और ApoB जैसे अन्य जोखिम संकेतकों को नियंत्रित करना, ब्लड प्रेशर और शुगर पर नजर रखना तथा धूम्रपान से बचना महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी समग्र हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है। Lp(a) कम करने के लिए नए उपचारों पर भी काम हो रहा है।
विशेषज्ञों की सलाह: Lp(a) की जांच और उसके परिणामों के आधार पर आगे की रणनीति तय करने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें। केवल सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट के आधार पर हृदय संबंधी जोखिम को पूरी तरह खारिज नहीं करना चाहिए।

