पीएम गति शक्ति योजना के तहत जमशेदपुर को लॉजिस्टिक हब बनाने की तैयारी तेज, व्यापक मास्टर प्लान पर मंथन

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औद्योगिक नगरी जमशेदपुर को देश के प्रमुख लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत शहर के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाना और उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना है.

इस संबंध में मंगलवार को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर के समग्र औद्योगिक और परिवहन विकास पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, नुवोको सीमेंट और चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित कई प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए. उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सड़क, रेल और अन्य परिवहन साधनों को एकीकृत कर मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया जाए, जिससे माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज और सस्ती हो सके. उन्होंने कहा कि पीएम गति शक्ति पोर्टल के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा. इस पहल से बड़े उद्योगों के साथ-साथ आदित्यपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों (एमएसएमई) को भी कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पादों के परिवहन में सहूलियत मिलेगी.  इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में भारत में लॉजिस्टिक लागत जीडीपी का लगभग 13 से 14 प्रतिशत है, जिसे सरकार 8 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखती है. जमशेदपुर में प्रस्तावित एकीकृत लॉजिस्टिक प्लान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. आज की बैठक में एनएचएआई और रेलवे के साथ समन्वय स्थापित कर ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने और ईंधन की बचत पर भी जोर दिया गया. भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए शहर में यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर सहमति बनी. उपायुक्त ने उद्योग महाप्रबंधक को निर्देश दिया कि सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेकर अप्रैल के पहले सप्ताह तक एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाए. इस मास्टर प्लान को प्रभावी बनाने के लिए अनुभवी कंसल्टेंट की सेवाएं भी ली जाएंगी. बैठक में शामिल सभी पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मजबूत लॉजिस्टिक ढांचा न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा. तैयार रिपोर्ट को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा.