झारखंड: झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी की CID जांच में अभ्यर्थियों से पैसे लेकर चयन कराने के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित सिंडिकेट के प्रमुख अभय तिवारी ने इंटरव्यू में सफल कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक लेने की बात सामने आई है। जांच में आरोप है कि पैसे के बदले इंटरव्यू के अंकों में बदलाव कर अभ्यर्थियों की मेरिट बेहतर कराई गई। (The Print)


CID से जुड़े बयानों के अनुसार, बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों और आयोग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क कराया जाता था। जांच में DSP रॉबिन कुमार, DSP शैलेश सिन्हा और डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक समेत कुछ चयनित अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए हैं। CID का आरोप है कि कथित नेटवर्क में आयोग से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारी, परीक्षा एजेंसी के कर्मचारी और बिचौलिए शामिल थे। (The Print)
जांच एजेंसी के अनुसार, इंटरव्यू के अंकों में कथित हेरफेर कर कई अभ्यर्थियों की मेरिट बदली गई। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि अभ्यर्थियों को संबंधित आयोग सदस्यों के संपर्क और इंटरव्यू पैनल तक पहुंच दिलाने की व्यवस्था की जाती थी। मामले में पैसों के लेन-देन और कथित सेटिंग की कड़ियों की भी जांच की जा रही है। (The Print)
CID की जांच का दायरा 11वीं-13वीं JPSC परीक्षा के अलावा अन्य भर्ती परीक्षाओं तक भी बढ़ा है। जांच एजेंसी ने अलग-अलग परीक्षाओं में OMR शीट से कथित छेड़छाड़ और अभ्यर्थियों से पैसे लेने के आरोप भी अदालत के सामने रखे हैं। (Live Hindustan)
मामले में आरोपी पक्षों की ओर से आरोपों का विरोध भी किया गया है और जांच के दावों को अदालत में चुनौती दी गई है। फिलहाल CID कथित सिंडिकेट, पैसों के लेन-देन, इंटरव्यू अंकों में बदलाव और चयनित अभ्यर्थियों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।

