झारखंड की औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. शहर में अब पारंपरिक हथियारों जैसे कट्टा और पिस्तौल की जगह ‘चाइनीज चापड़’ ने ले ली है. पिछले दो महीनों में इस धारदार हथियार से 22 हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.


पुलिस सूत्रों के अनुसार, शहर में चापड़ से हमला करना अपराधियों के बीच एक नया ट्रेंड बन गया है. चिंताजनक बात यह है कि इस खतरनाक हथियार का इस्तेमाल केवल पेशेवर अपराधी ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग भी कर रहा है. स्कूल, कॉलेज, पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर छोटी-छोटी बातों पर विवाद के दौरान चापड़ निकालकर हमला करने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे शहर में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है.
* क्यों बढ़ रहा है चापड़ का इस्तेमाल-
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हैं. शहर के बाजारों में चापड़ आसानी से उपलब्ध है और इसकी कीमत भी कम होती है, जिससे यह युवाओं और अपराधियों के लिए सुलभ हथियार बन गया है. इसकी तेज धार कम समय में गंभीर चोट पहुंचाने में सक्षम होती है. साथ ही इसे बैग या कपड़ों में आसानी से छिपाया जा सकता है. इसके अलावा, बंदूक और पिस्तौल की तुलना में इस तरह के धारदार हथियारों पर पुलिस की निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं.
* हाल की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता-
हाल ही में 22 मार्च की रात टेल्को घड़ी पार्क के पास वर्चस्व को लेकर आयुष यादव पर चापड़ से हमला किया गया. इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आने से पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है.
* पुलिस के सामने चुनौती-
अपराध के इस नए ट्रेंड ने जमशेदपुर पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. पुलिस अब न केवल अपराधियों पर कार्रवाई की रणनीति बना रही है, बल्कि बाजारों में चापड़ की बिक्री और युवाओं के बीच इसके बढ़ते इस्तेमाल पर भी नजर रखने की तैयारी कर रही है. शहर में बढ़ती इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह ट्रेंड और खतरनाक रूप ले सकता है.

