आसंगी में निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर की जमीन जियाडा को हस्तांतरित, महिला छात्रावास प्रस्ताव पर ग्रामीणों का विरोध

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सरायकेला (संजीव मेहता): आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के आसंगी गांव में अनाबाद झारखंड सरकार की जमीन पर पिछले चार वर्षों से निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर की भूमि के एक हिस्से को झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) को हस्तांतरित किए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। शनिवार को आसंगी और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने प्रेस वार्ता कर इस निर्णय का विरोध जताया और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

ग्रामीणों के अनुसार, आसंगी मौजा स्थित लगभग चार एकड़ भूमि (खाता संख्या-242) पर वर्ष 2022 से जगन्नाथ मंदिर का निर्माण चल रहा है। मंदिर निर्माण का शुभारंभ तत्कालीन विधायक एवं मंत्री चंपई सोरेन ने किया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी भूखंड में से लगभग 2.20 एकड़ भूमि को 6 जनवरी 2026 को उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह द्वारा जियाडा के नाम हस्तांतरित कर दिया गया, जहां 500 बेड का महिला श्रमिक छात्रावास बनाने की योजना तैयार की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आती है और भूमि हस्तांतरण से पहले ग्रामसभा की सहमति नहीं ली गई। उनका आरोप है कि बिना ग्रामसभा और स्थानीय लोगों की राय लिए निर्णय लिया गया, जो नियमों के विरुद्ध है।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि प्रस्तावित छात्रावास बनने से मंदिर परिसर की धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। उन्होंने बताया कि भूखंड के नीचे लगभग नौ एकड़ का पारंपरिक तालाब है, जहां मनसा पूजा, काली पूजा सहित विभिन्न धार्मिक आयोजनों के दौरान घट विसर्जन और प्रतिमा विसर्जन किया जाता है। उनका कहना है कि छात्रावास बनने से तालाब के अस्तित्व और धार्मिक परंपराओं पर भी खतरा उत्पन्न होगा।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि आसंगी पहले से ही विस्थापित गांव है और क्षेत्र में उद्योगों व अन्य संस्थानों द्वारा भूमि अधिग्रहण के बावजूद स्थानीय विकास और सीएसआर के तहत अपेक्षित कार्य नहीं हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि भूमि हस्तांतरण से पहले नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) क्यों नहीं लिया गया।

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जगन्नाथ मंदिर और उससे जुड़ी धार्मिक भावनाओं पर किसी प्रकार का आघात पहुंचाने का प्रयास किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर जियाडा और जिला प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन और घेराव भी किया जाएगा।

प्रेस वार्ता में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में भूमि हस्तांतरण के फैसले का विरोध किया। हालांकि, इस मामले में जिला प्रशासन और जियाडा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।