कोलकाता में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने दो विधायकों संदीपन साहा और रीतब्रत बनर्जी को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में दोनों नेताओं पर संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करने और पार्टी हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया है।


टीएमसी नेतृत्व ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि दोनों विधायक पार्टी द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठकों से लगातार अनुपस्थित रहे और उनकी गतिविधियां संगठन के लिए नुकसानदायक साबित हो रही थीं। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए पार्टी ने तत्काल प्रभाव से यह कार्रवाई की।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद को लेकर गरमाई हुई है। इस विवाद ने उस समय तूल पकड़ा जब विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए एक पत्र में जाली हस्ताक्षरों की शिकायत खुद इन दोनों विधायकों ने की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अपराध जांच विभाग (CID) को सौंपी गई है, जो पूरे प्रकरण की तह तक जाने में जुटी है। इस बीच, टीएमसी के इस फैसले को पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और आंतरिक असंतोष पर नियंत्रण के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ दो विधायकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के अन्य नेताओं के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि संगठनात्मक अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का राज्य की राजनीति और विधानसभा के समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

