घरेलू सहायिका से मंत्री बनीं कलिता माझी, संघर्ष की बनी मिसाल

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कोलकाता में पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक प्रेरणादायक अध्याय जुड़ गया, जब कभी घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली 37 वर्षीय कलिता माझी ने राज्य सरकार में मंत्री पद की शपथ ली। पूर्व बर्धमान जिले के आउसग्राम विधानसभा क्षेत्र से जीतकर विधानसभा पहुंचीं कलिता माझी अब राज्य मंत्रिमंडल का हिस्सा बन गई हैं।

साधारण परिवार से आने वाली कलिता माझी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। गुसकरा नगरपालिका क्षेत्र के माझपुकुर पाड़ा की निवासी कलिता के पति सुब्रत माझी पेशे से प्लंबर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए उन्होंने वर्षों तक लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करने का काम किया। इसके साथ ही वे करीब दस वर्षों तक जमीनी स्तर पर राजनीति में सक्रिय रहीं और संगठन के लिए लगातार काम करती रहीं।

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पहली बार उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने प्रयास जारी रखे। वर्ष 2026 के चुनाव में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 1,07,692 वोट हासिल किए और अपने प्रतिद्वंद्वी को 12,535 मतों से हराकर विधानसभा पहुंचीं। उनकी इस जीत के बाद उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

मंत्री पद की शपथ लेने के बाद कलिता माझी ने कहा कि वे अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी और संघर्ष को करीब से देखने के कारण उनकी प्राथमिकता आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना होगा। उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल, सड़क, रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई।

कलिता माझी ने यह भी बताया कि जिन घरों में वे काम करती थीं, वहां के लोगों ने चुनाव के दौरान उनका मनोबल बढ़ाया और हर संभव सहयोग दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मंत्री बनने के बाद भी उनका जीवन और सोच नहीं बदलेगी और वे हमेशा आम लोगों के बीच रहकर उनकी सेवा करती रहेंगी।