रांची: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत झारखंड के 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू)के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 20 केंद्रों का चयन किया गया है, जहां आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार किया जाएगा।


इस योजना को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC) की ओर से ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिला और प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों को एफआरयू विकसित करने की प्रक्रिया, मानकों और आवश्यक तैयारियों की जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चयनित केंद्रों का विस्तृत मूल्यांकन कर वहां मौजूद कमियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, आधुनिक उपकरणों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि सभी केंद्रों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके।
एफआरयू के रूप में विकसित होने के बाद इन केंद्रों में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा जटिल प्रसव, सिजेरियन ऑपरेशन, नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल और रक्त से संबंधित आवश्यक सेवाएं भी स्थानीय स्तर पर प्रदान की जाएंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की बड़े अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस पहल से दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बढ़ेगी और विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही ग्रामीण मरीजों को समय पर उपचार मिलने से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं में भी कमी आएगी।

