हजारीबाग: कोनार डैम विस्थापित परिवार 70 साल बाद भी पुनर्वास की प्रतीक्षा में, न्याय और मूलभूत सुविधाओं की मांग तेज

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कोनार डैम निर्माण के कारण विस्थापित हुए परिवारों का दर्द सात दशक बाद भी कम नहीं हुआ है। विकास परियोजना के लिए अपनी जमीन और घर छोड़ने वाले कई परिवार आज भी पूर्ण पुनर्वास, मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विस्थापित लोगों का आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

विस्थापित परिवारों का कहना है कि डैम निर्माण के समय उन्हें बेहतर पुनर्वास, रोजगार और सुविधाओं का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अधिकांश वादे आज तक अधूरे हैं। कई परिवारों को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही स्थायी आजीविका की व्यवस्था हो सकी। इसी कारण विस्थापितों की नई पीढ़ी भी आज कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर है।

स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। रोजगार के अवसर न होने के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन तो ले ली गई, लेकिन उन्हें विकास का लाभ नहीं मिला।

विस्थापित परिवारों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से पुनर्वास से जुड़े पुराने मामलों की समीक्षा कर लंबित मांगों के समाधान की अपील की है। उनका कहना है कि जिन्होंने राज्य और देश के विकास के लिए सब कुछ खो दिया, उन्हें न्याय और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए।

कोनार डैम क्षेत्र के विस्थापितों का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में परिवार समाधान की प्रतीक्षा में हैं। विस्थापितों का कहना है कि जब तक पुनर्वास, मुआवजा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।