रांची: झारखंड में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद लंबित मामलों की संख्या पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य में साइबर क्राइम से जुड़े 2,730 मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें अब तक केवल 351 मामलों का निपटारा हुआ है। यानी करीब 12.85 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई पूरी हो सकी है।


साइबर ठगी के बाद पीड़ितों के लिए सबसे अहम कदम 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करना है। ठगी की रकम को आगे दूसरे खातों में जाने से रोकने के लिए बैंक खाते में Lien लगाया जाता है। झारखंड में ठगी की रकम रोकने की दर 17.23 प्रतिशत बताई गई है। इससे पुलिस और बैंकिंग व्यवस्था के सामने रकम को समय रहते रोकने की चुनौती साफ दिखाई देती है।
साइबर अपराध के मामलों में रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर प्रमुख क्षेत्र के रूप में सामने आए हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में संदिग्ध बैंक खाते और साइबर अपराध से जुड़े ठिकाने चिन्हित किए गए हैं।
समीक्षा के अनुसार अब तक साइबर अपराध के मामलों में 337 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 109 मामले समन्वय प्लेटफॉर्म पर दर्ज हुए हैं।
तकनीकी जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले NetGrid के झारखंड में 49 यूजर हैं, लेकिन इनमें केवल 26 सक्रिय हैं। 23 यूजर फिलहाल सक्रिय नहीं हैं। मोबाइल नंबर और IMEI ब्लॉकिंग से जुड़े कई मामले भी लंबित हैं।
आंकड़े बताते हैं कि साइबर ठगी के खिलाफ सिर्फ शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। शिकायत के तुरंत बाद कार्रवाई और पुराने मामलों का तेजी से निपटारा पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है।

