खूंटी में जमीन म्यूटेशन के बदले रिश्वत लेने का मामला: एसीबी कोर्ट ने आरोपी कर्मचारी को एक वर्ष की सजा सुनाई

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रांची। भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में एसीबी की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रिश्वत लेने के आरोपी सत्यानारायण राम को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

अदालत के आदेश के अनुसार, यदि आरोपी निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त छह माह की सजा भुगतनी होगी।

यह मामला वर्ष 2006 का है। उस समय सत्यानारायण राम खूंटी अंचल कार्यालय में कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) से संबंधित कार्य पूरा करने के बदले एक व्यक्ति से 500 रुपये रिश्वत की मांग की थी।

रिश्वत की मांग से परेशान शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को दी थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन किया और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की योजना बनाई।

एसीबी की टीम ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी कर्मचारी को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद जांच पूरी कर मामला अदालत में प्रस्तुत किया गया। करीब दो दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अब इस मामले में अपना फैसला सुनाया है।

अदालत के इस निर्णय को भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एसीबी ने कहा है कि सरकारी कार्यों के बदले रिश्वत लेने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।