बहरागोड़ा: करीब 50 लाख रुपये की लागत से बना रामचंद्रपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। बरसोल क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस केंद्र में वर्तमान में एक भी चिकित्सक नहीं होने का दावा किया जा रहा है। केंद्र का संचालन दो एएनएम राजमणि कुमारी और आशा लता तथा फार्मासिस्ट संजय दास के भरोसे चल रहा है।


स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाज की उम्मीद लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले मरीजों को कई बार रेफर की पर्ची लेकर लौटना पड़ता है। केंद्र में करीब पांच बेड की व्यवस्था है और रोजाना 30 से अधिक मरीज पहुंचने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक यहां एक्स-रे, ब्लड जांच और ईसीजी जैसी जरूरी जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। गंभीर मरीजों को गोपीबल्लवपुर रेफर किया जाता है। डॉक्टर और जांच सुविधाओं की कमी के कारण मामूली बीमारी में भी मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने दवाओं की नियमित उपलब्धता पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार कभी-कभी एंटी रेबीज वैक्सीन और सांप काटने के बाद जरूरी दवा भी उपलब्ध नहीं रहती। सामान्य तौर पर बुखार, खांसी और सिरदर्द जैसी बीमारियों की दवाएं ही मिलने की बात कही गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने नियमित चिकित्सक, पर्याप्त दवाएं, जांच सुविधाएं और बेहतर आपातकालीन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उत्पल मुर्मू ने कहा कि सुविधाओं की कमी से विभाग को अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है।

