जमशेदपुर : लगभग 15 वर्षों से लंबित एक महत्वपूर्ण न्यायिक मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सीमा मिज की अदालत ने साकची निवासी उमेश साहू और मानगो निवासी विनय शर्मा को साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। वर्ष 2011 में साकची निवासी गीतनंदन वार्ष्णेय द्वारा दायर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों आरोपितों ने गबन और धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में Jharkhand High Court से जमानत लेने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता को अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया, लेकिन लंबी प्रक्रिया के बावजूद वह ठोस और विश्वसनीय प्रमाण पेश नहीं कर सका। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू और बबिता जैन ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 245 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 268 का हवाला देते हुए आरोपमुक्त करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं और अंततः दोनों आरोपितों को बरी कर दिया। इस फैसले के साथ 2011 से लंबित यह मामला समाप्त हो गया, जिसे बचाव पक्ष ने न्याय की जीत बताया।



