अखिल भारतीय साहित्य परिषद, न्यास एवं तुलसी भवन के संयुक्त तत्वावधान में 16 मई 2026 को “स्वर लोकमंथन के” नामक भव्य सांस्कृतिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकगीतों, लोकभाषाओं और भारतीय लोकसंस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. परसेनजीत तिवारी ने की, जबकि संचालन सूरज सिंह राजपूत द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. देवदास साकेत (रीवा, मध्य प्रदेश) ने लोकसंस्कृति के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि लोकसाहित्य हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार है।
कार्यक्रम का विषय-प्रवेश डॉ. मीनाक्षी मीनल ने कराया, जबकि स्वागत भाषण शैलेंद्र पांडे शैल ने दिया। विशिष्ट अतिथियों में वाल्मीकि कुमार प्रखर, डॉ. रागिनी भूषण, विजया लक्ष्मी वेदुला और संदीप मुरारका शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान संथाली, बंगाली, भोजपुरी, पंजाबी, बज्जिका, संस्कृत, राजस्थानी और मैथिली भाषाओं में लोकगीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। जोबा मुर्मू, राजेंद्र राज शाह, सुदीप्ता जेठी राउत, ब्रजेंद्रनाथ मिश्र, बलविंदर सिंह और उपासना सिन्हासहित कई कलाकारों ने प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. परसेनजीत तिवारी ने कहा कि लोकसंस्कृति भारतीय सभ्यता की आत्मा है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में मुकेश रंजन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ आयोजन का समापन हुआ। यह आयोजन साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में एक सफल और प्रेरणादायक पहल साबित हुआ।

