गढ़वा: 14 साल बाद परिवार से मिली महिला, देवघर के बालिका गृह में रह रही थी

Spread the love

गढ़वा: रमना प्रखंड के चटनिया गांव की एक महिला 14 साल बाद अपने परिवार के पास लौट आई। लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण परिजनों ने मान लिया था कि उनकी बेटी अब जीवित नहीं है। 25 सितंबर 2026 को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद देवघर स्थित बालिका गृह में 14 वर्षों से रह रही महिला को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार की ओर से उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, अब उसकी उम्र करीब 30 वर्ष है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2011 में किशोरी मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में भटकते हुए पश्चिम बंगाल के हावड़ा पहुंच गई थी। हावड़ा बाल कल्याण समिति ने उसे संरक्षण में लेकर बाल गृह में रखा, जहां करीब एक वर्ष तक उसकी देखभाल की गई। उस समय वह स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाती थी और केवल इतना बता पाती थी कि वह झारखंड की रहने वाली है।

परिवार के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के बाद वर्ष 2012 में उसे बालिका गृह, देवघर स्थानांतरित किया गया। वहां रिनपास, रांची में उसका नियमित उपचार कराया गया और लगातार काउंसलिंग की गई। उपचार और परामर्श के बाद उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और उसने पिता, जिला तथा भाई-बहनों के नाम बताने शुरू किए।

इन जानकारियों के आधार पर बाल कल्याण समिति, देवघर ने रमना थाना प्रभारी और संबंधित क्षेत्र के मुखिया से संपर्क कर पहचान की पुष्टि कराई। इसके बाद परिवार का पता लगाया गया। महिला को परिवार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बाल कल्याण समिति, देवघर के साथ चेतना विकास देवघर की नीता पाठक और विजय यादव, चाइल्ड हेल्पलाइन देवघर के नंदकिशोर बास्की तथा रमना थाना के पूर्व और वर्तमान थाना प्रभारियों की भूमिका रही।

लगातार प्रयासों के बाद 14 वर्षों से परिवार से दूर रही महिला का अपने परिजनों से पुनर्मिलन हो सका। महिला के परिवार तक पहुंचने के साथ ही वर्षों से चली आ रही तलाश भी समाप्त हो गई।