रांची-बेंगलुरु रेल मार्ग पर बढ़ती भीड़: यात्रियों की परेशानी कब होगी दूर?

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रांची से बेंगलुरु की यात्रा आज झारखंड के हजारों लोगों की आवश्यकता बन चुकी है। कोई रोजगार की तलाश में जाता है, कोई उच्च शिक्षा के लिए, तो कोई अपने परिवार के बेहतर भविष्य के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से इस लंबी यात्रा पर निकलता है। लेकिन इन सपनों की राह में सबसे बड़ी बाधा बनती जा रही है ट्रेनों में लगातार बढ़ती भीड़।

ट्रेन संख्या 12835 हटिया-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस में लगभग हर यात्रा के दौरान भारी भीड़ देखने को मिलती है। यात्रियों का कहना है कि रांची-बेंगलुरु मार्ग पर यात्रा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन रेलवे की ओर से न तो नई ट्रेनों की शुरुआत की गई है और न ही मौजूदा ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ाई गई है। नतीजतन यात्रियों को लंबी वेटिंग लिस्ट, सीटों की कमी और भीड़भाड़ वाले डिब्बों में सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई बार आरक्षित कोचों में भी यात्रियों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती। सोशल मीडिया पर भी यात्रियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि झारखंड और बेंगलुरु के बीच आवागमन करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गई हैं। वर्षों से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रेनों की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

झारखंड रेल उपभोक्ता संघ ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सांसद संजय सेठ और रेल मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन का कहना है कि यह केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि उन हजारों छात्रों, मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों और परिवारों की परेशानी से जुड़ा विषय है, जो बेहतर अवसरों की तलाश में इस मार्ग पर नियमित यात्रा करते हैं।

यात्रियों की मांग है कि रांची-बेंगलुरु रेल मार्ग पर नई ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाए, मौजूदा ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ाई जाए और अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं। इससे यात्रियों को भीड़भाड़ और असुविधा से राहत मिल सकेगी।

जब तक मांग के अनुरूप रेल क्षमता नहीं बढ़ाई जाती, तब तक इस मार्ग पर सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए हर यात्रा एक नई चुनौती बनी रहेगी। अब देखना यह है कि रेलवे और जनप्रतिनिधि इस लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए कब और क्या कदम उठाते हैं।