जमशेदपुर: केंद्र सरकार के MMDR Act 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस कानून को राज्य के खनिज अधिकारों और आर्थिक हितों के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया है। पार्टी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि झारखंड अपने खनिज अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।


कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां कोयला और लौह अयस्क समेत कई महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन होता है, लेकिन खनन के कारण होने वाले विस्थापन और प्रदूषण का असर राज्य के लोगों को झेलना पड़ता है। ऐसे में खनिजों से मिलने वाले राजस्व पर राज्य के अधिकार को कमजोर करना उचित नहीं है।
उन्होंने 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के नौ सदस्यीय संविधान पीठ के 8:1 फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों के खनिजों पर सेस और टैक्स लगाने के अधिकार को मान्यता दी गई थी। JMM के अनुसार, इसके बाद राज्य सरकार द्वारा बनाए गए कानून से चालू वित्तीय वर्ष में राज्य को अतिरिक्त 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने का अनुमान था।
षाड़ंगी ने आरोप लगाया कि MMDR Act 2026 राज्य के इस अधिकार को प्रभावित कर सकता है, जिससे झारखंड की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये की मांग भी कर रही है।
उन्होंने कहा कि राजस्व में कमी का असर केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक पेंशन योजनाओं और मंईयां सम्मान योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
JMM नेता ने झारखंड के 12 सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के खनिज हितों की आवाज संसद में मजबूती से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर MMDR Act 2026 को वापस लेने की मांग की है।
कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि JMM लोकतांत्रिक तरीके से हर स्तर पर आंदोलन करेगा और जरूरत पड़ने पर इसे और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज अधिकारों की लड़ाई में पार्टी पीछे नहीं हटेगी और राज्य के हितों के लिए जनता के साथ सड़क पर उतरने से भी परहेज नहीं करेगी।

