जमशेदपुर: सरना धर्म कोड की मांग को लेकर माझी परगना महाल की बैठक, निर्णायक लड़ाई का लिया संकल्प

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जमशेदपुर: करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान परिसर में बुधवार को माझी परगना महाल की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता जुगसलाई तोरोप परगना दशमत हांसदा ने की। इसमें आदिवासी संताल समाज के अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की रक्षा के साथ सरना धर्म कोड की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

दशमत हांसदा ने समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने माझी बाबा, नायके बाबा, पारानिक और गोडेत से अपने-अपने गांवों में सरना धर्म की मान्यता को लेकर बैठकें आयोजित करने की अपील की। बैठक में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और रजिस्ट्रार जनरल को क्षेत्र से बड़ी संख्या में पत्र और स्पीड पोस्ट भेजने तथा सामाजिक संगठनों एवं धार्मिक संस्थानों के माध्यम से केंद्र सरकार को मांग पत्र भेजने की अपील की गई।

दशमत हांसदा ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि कुछ विरोधी तत्व आदिवासी समाज को संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखना चाहते हैं।

बैठक में करनडीह जाहेरथान में पूर्व आयोजित सरना धर्म सम्मेलन की समीक्षा भी हुई। कुचूं दिशोम देश पारानिक बाबा नवीन मुर्मू ने सम्मेलन का आय-व्यय प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।

बैठक में कोल्हान प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन के बाद धाड़, कुचूंग, बारहा, पातकोम और सिंञ दिशोम में धर्म सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। फरवरी के अंत तक सभी दिशोम में सम्मेलन आयोजित कर आगामी जनगणना में सरना धर्म कोड दर्ज कराने के लिए जन-जागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया गया।