रांची: बोकारो की 18 वर्षीय लापता युवती पुष्पा कुमारी मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों से कड़े सवाल पूछे। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि संदिग्ध मानव कंकाल का डीएनए परीक्षण अभी तक नहीं हो सका है, क्योंकि कंकाल को रिम्स भेजे जाने के दौरान उस पर एक विशेष रसायन का उपयोग किया गया था, जिससे जांच प्रभावित हो रही है।


सुनवाई के दौरान बोकारो के आईजी, एसपी और जांच के लिए गठित एसआईटी प्रमुख अदालत में उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि कंकाल पर रसायन का प्रयोग क्यों किया गया और यदि डीएनए जांच में और समय लगेगा तो इसके ठोस कारण प्रस्तुत किए जाएं। अदालत ने अगली सुनवाई में आईजी और एसपी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देते हुए एसआईटी प्रमुख को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
गौरतलब है कि पुष्पा कुमारी 31 जुलाई 2025 से लापता है। परिजनों की ओर से काफी तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं मिलने पर उसकी मां ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जांच के दौरान मिले एक मानव कंकाल ने मामले को और उलझा दिया है। अब सभी की निगाहें डीएनए रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद कंकाल पुष्पा का है या किसी अन्य व्यक्ति का।

