झारखंड न्यूज: राज्य में दहेज प्रताड़ना, दहेज हत्या और विवाहित महिलाओं की संदिग्ध मौत से जुड़े मामलों को लेकर झारखंड पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को निर्देश जारी करते हुए ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। नई गाइडलाइन के तहत दहेज से जुड़े मामलों में शिकायत मिलते ही तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।


पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दहेज उत्पीड़न या दहेज से संबंधित किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और कार्रवाई में किसी प्रकार की देरी न हो। इसके साथ ही जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय मिल सके।
यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दहेज प्रथा को समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए राज्यों को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी याद दिलाने के बाद जारी किया गया है। न्यायालय ने दहेज निषेध कानून के सख्त अनुपालन के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया था।
इसके बाद गृह विभाग ने भी सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजकर दहेज विरोधी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को दहेज निषेध पदाधिकारियों की भूमिका मजबूत करने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।
पुलिस मुख्यालय का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी दहेज संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जिला स्तर पर पुलिस और प्रशासन को संयुक्त रूप से जनजागरूकता अभियान चलाने तथा लोगों को कानून और उसके प्रावधानों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। नई गाइडलाइन के बाद अब जिलों में होने वाली कार्रवाई की गति और प्रभावशीलता पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

