झारखंड: झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ को झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से विधिवत संबद्धता प्रदान की गई है। 4 अक्टूबर 2026 को आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में दोनों संगठनों के महामंत्री विश्वम्भर यादव और बीरेंद्र यादव ने इसकी जानकारी दी। संबद्धता झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के 10 सितंबर 2026 के अनुरोध और झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के 21 सितंबर 2026 के पत्र के आधार पर दी गई है।


दोनों महासंघों ने कहा कि अब राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं तथा न्यायसंगत मांगों को व्यापक राज्यस्तरीय कर्मचारी मंच पर उठाया जाएगा। महासंघ ने स्पष्ट किया कि उसका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रशासन, वित्तीय अनुशासन, बेहतर मानव संसाधन व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों के लिए है।
प्रेसवार्ता में गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की कमी और नियमित नियुक्ति के अभाव को प्रमुख समस्या बताया गया। महासंघ ने आवश्यक स्वीकृत पदों की समीक्षा कर नियमित नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। इसके साथ ही लंबित ACP/MACP और पदोन्नति मामलों के शीघ्र निष्पादन तथा पुनर्संरचित पदों के अनुरूप योग्य और अनुभवी कर्मचारियों के समायोजन एवं पदोन्नति की मांग उठाई गई।
महासंघ ने पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन में वर्षों से कार्यरत गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उनकी योग्यता, अनुभव और सेवा अवधि के आधार पर नियमानुसार समायोजन या नियोजन की मांग की। संविदा कर्मचारियों के लिए पारदर्शी वेतन पुनरीक्षण और वार्षिक वृद्धि की नीति बनाने की भी मांग की गई।
आउटसोर्स कर्मचारियों के मामले में निर्धारित Man-Month Rate लागू करने, समय पर वेतन भुगतान, नियुक्ति या सेवा पत्र, EPF, ESIC, बोनस, मातृत्व लाभ, अवकाश और अन्य वैधानिक सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। महासंघ ने तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत योग्य कर्मचारियों की स्थिति पर भी सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
इसके अलावा महासंघ ने विश्वविद्यालयों में सार्वजनिक धन से होने वाली बड़ी खरीद में पारदर्शिता, आवश्यकता एवं उपयोगिता के मूल्यांकन और वित्तीय नियमों के पालन की मांग की। दोनों संगठनों ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए।

