झारखंड में दवाओं की कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी, इलाज का खर्च बढ़ने से मरीज परेशान

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झारखंड में इलाज करा रहे मरीजों पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। राज्य में कई आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दवा कारोबारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों और कच्चे माल की लागत में वृद्धि का सीधा असर दवाओं के दाम पर पड़ा है।

इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और थायरॉइड जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ रहा है। नियमित दवाएं लेने वाले कई मरीज अब एक महीने की जगह केवल 15 दिनों की दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। केंद्र सरकार द्वारा दवाओं पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बावजूद मरीजों को इसका प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ने से दाम कम नहीं हो पाए हैं।

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सिस्प्लाटिन, कार्बोप्लाटिन और ऑक्सालिप्लाटिन जैसी दवाओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। वहीं पैरासिटामोल जैसी सामान्य दवाएं भी महंगी हो गई हैं, जिससे आम मरीजों के इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।