मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग और भाजपा पर सवाल उठाए जाने के बीच अब एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नामांकन प्रक्रिया से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी उम्मीदवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज है तो उसकी जानकारी देना आवश्यक होता है।


असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग के नामांकन फॉर्म में स्पष्ट प्रावधान है कि उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज किसी भी एफआईआर का उल्लेख किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित पक्ष का दावा है कि उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। ऐसे में इस पूरे मामले में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए।
ओवैसी ने राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सिंघवी का कहना है कि उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी और मामला केवल एक निजी शिकायत से जुड़ा था। उन्हें केवल अदालत में उपस्थित होने का नोटिस मिला था। हालांकि ओवैसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले के सभी तथ्यों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू होने के बाद कानूनी प्रक्रिया में बदलाव आया है। पहले कई मामलों में अदालत शिकायत मिलने पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देती थी, लेकिन अब प्रक्रिया पहले जैसी नहीं रही है। ऐसे में संबंधित मामले की कानूनी स्थिति को समझना आवश्यक है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पूरे मामले में निष्पक्षता की अनदेखी हुई है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी के सभी 62 विधायकों ने राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा है। समय मिलने पर कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा, अन्यथा पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी।
वहीं कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा कि पार्टी को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से सबसे अधिक उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और अदालत जो भी निर्णय देगी, उसका सम्मान किया जाएगा।
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने का मामला अब केवल चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके कानूनी और राजनीतिक दोनों पहलू सामने आ रहे हैं। ओवैसी के बयान के बाद नामांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों पर नई बहस शुरू हो गई है।

