एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी पर बढ़ा मरीजों का दबाव, बेड नहीं मिलने से कई मरीजों का जमीन पर इलाज

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जमशेदपुर: जमशेदपुर के डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में इन दिनों मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। वायरल फीवर, मलेरिया और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या के चलते इमरजेंसी में उपलब्ध बेड, स्ट्रेचर, बेंच और कुर्सियां पूरी तरह भर चुकी हैं। स्थिति यह है कि कई मरीजों का इलाज जमीन पर लेटाकर किया जा रहा है।

अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन मरीजों की संख्या के मुकाबले बेड की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई आपातकालीन मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

अस्पताल प्रबंधन ने हाल ही में 18 नए स्ट्रेचर-बेड मंगवाए हैं, लेकिन सोमवार देर रात तक उनका उपयोग शुरू नहीं हो सका। नए स्ट्रेचर-बेड पंजीकरण काउंटर के पास स्थित हॉल में रखे रहे, जबकि इमरजेंसी में मरीजों को जगह की कमी से जूझना पड़ा। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, इन स्ट्रेचर-बेड का अभी तक इमरजेंसी वार्ड को आवंटन नहीं किया गया है।

73 वर्षीय मकरी हांसदा, जो घाटशिला प्रखंड के चौईरा गांव के निवासी हैं, को शनिवार और रविवार को जमीन पर लिटाकर रक्त चढ़ाया गया। उनके पुत्र सामू हांसदा ने बताया कि रक्त की व्यवस्था भी परिवार को स्वयं करनी पड़ी, जिसमें एक रक्तदान संस्था ने सहयोग किया। मकरी हांसदा किडनी, हृदय और गैस संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं तथा उन्हें सांस लेने में भी परेशानी थी। सोमवार दोपहर करीब तीन बजे उन्हें अस्पताल में बेड उपलब्ध कराया गया।

वहीं, घाटशिला के छोटा यमुना निवासी 45 वर्षीय असित मानकी को रविवार को सांप काटने के बाद घाटशिला अनुमंडल अस्पताल से एमजीएम रेफर किया गया, लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी उन्हें बेड नहीं मिल सका। उनका रक्त नमूना लेकर उपचार जारी रखा गया। इसी तरह साकची के काशीडीह निवासी 40 वर्षीय पूजा सिंह को सोमवार सुबह लकवा की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया, लेकिन उन्हें भी बेड मिलने के लिए इंतजार करना पड़ा।

अस्पताल में कई अन्य मरीजों का भी इलाज जमीन, स्ट्रेचर और कुर्सियों पर किया गया। मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि इमरजेंसी में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जाए, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर समुचित उपचार मिल सके।