नई दिल्ली :जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक ऊर्जा और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बीच यह संकेत सामने आया है कि अमेरिका रूसी तेल पर दी जाने वाली सैंक्शन छूट को आगे नहीं बढ़ाने के पक्ष में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का रुख इस ओर है कि रूस से तेल खरीदने पर दी गई अस्थायी छूट को समाप्त किया जाए।


इस फैसले का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो पिछले कुछ समय से रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का बड़ा आयात कर रहे हैं। अगर यह छूट खत्म होती है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयात लागत और घरेलू ईंधन बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच यह नीति बदलाव तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकता है। भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विविध स्रोतों पर निर्भर है, ऐसे में इस फैसले का दीर्घकालिक असर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

