झारखंड के महुआडांड़ क्षेत्र से शुक्रवार को जनजातीय समाज का एक विशाल जत्था नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित “जनजातीय सांस्कृतिक समागम एवं महा गर्जना रैली” में भाग लेने के लिए रवाना हुआ। पारंपरिक वेशभूषा, तीर-धनुष और मांदर-ढोल की थाप के साथ निकले इस जनसैलाब ने पूरे क्षेत्र को जनजातीय रंग में रंग दिया।


जनजातीय सुरक्षा मंच के तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा में झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों आदिवासी प्रतिनिधि शामिल हुए। जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा स्वागत किया गया, जबकि युवाओं और महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक नारों और सांस्कृतिक प्रदर्शन ने माहौल को जोशपूर्ण बना दिया।
आयोजकों के अनुसार, नई दिल्ली में होने वाले इस महासमागम में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से लाखों आदिवासी प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
रैली का मुख्य उद्देश्य जनजातीय संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत करना बताया गया है। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोककलाओं के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया जाएगा।
रेल मंत्रालय द्वारा विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत झारखंड से करीब 4500 प्रतिनिधि रांची से दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। समागम से पहले राज्यभर के सरना स्थलों और देवी मंडपों में पूजा-अर्चना भी की गई।
इस रैली का प्रमुख मुद्दा “डी-लिस्टिंग” की मांग है, जिसके तहत धर्मांतरण कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची से बाहर करने की बात कही जा रही है। आयोजकों का कहना है कि यह कदम मूल आदिवासी समाज के अधिकारों और पहचान की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर विरोध के स्वर भी सामने आए हैं। झारखंड के कई आदिवासी और सामाजिक संगठनों ने इसका बहिष्कार करने का ऐलान किया है। उनका आरोप है कि डी-लिस्टिंग के नाम पर समाज की एकता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
महुआडांड़ से बड़ी संख्या में लोगों का दिल्ली के लिए रवाना होना क्षेत्र में जनजातीय एकजुटता और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक माना जा रहा है। यह कारवां अब राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता की आवाज के रूप में उभरता दिख रहा है।

