झारखंड में सड़क निर्माण परियोजनाओं पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच अलकतरा (बिटुमेन) की कीमतों में तेज वृद्धि से राज्य में सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। निर्माण एजेंसियों ने बढ़ी हुई लागत को देखते हुए सरकार से भुगतान दरों में संशोधन की मांग की है, हालांकि इस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।


सरकारी सूत्रों के अनुसार, सड़क निर्माण कार्यों के लिए पहले अलकतरा की दर 7,500 रुपये प्रति ड्रम तय थी और भुगतान इसी आधार पर किया जाता था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2026 तक एक ड्रम की कीमत 11,000 रुपये तक पहुंच गई थी, जबकि वर्तमान में यह बढ़कर लगभग 17,000 रुपये प्रति ड्रम हो चुकी है। एक ड्रम में 156.4 किलोग्राम अलकतरा होता है।
कीमतों में दोगुनी से अधिक वृद्धि के कारण निर्माण एजेंसियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। ठेकेदारों का कहना है कि सरकारी अनुमान और मौजूदा बाजार दरों के बीच बड़ा अंतर होने से तय लागत में परियोजनाओं को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कई एजेंसियों को वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
ठेकेदारों ने सरकार से मांग की है कि भुगतान मौजूदा बाजार दर के अनुसार किया जाए, क्योंकि अभी भी सड़क निर्माण की योजनाओं में अलकतरा की दर 7,500 रुपये प्रति ड्रम ही तय है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ निर्माण एजेंसियों को उठाना पड़ रहा है।
इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बैठक भी हुई, जिसमें बढ़ी हुई कीमतों और भुगतान दरों पर चर्चा की गई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं निकल सका। इससे निर्माण एजेंसियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
यदि जल्द ही भुगतान दरों में संशोधन नहीं किया गया तो राज्य में कई सड़क परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है। निर्माण एजेंसियों का कहना है कि बढ़ती लागत और भुगतान अंतर के कारण समय पर परियोजनाओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

