22 साल पुराने दहेज प्रताड़ना मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने 22 वर्ष पुराने दहेज प्रताड़ना मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार रखना न्यायसंगत नहीं है।

मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दहेज मांगने और पत्नी के साथ क्रूरता करने का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

अपील की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास हैं, जिनके आधार पर आरोपों की पुष्टि नहीं की जा सकती।

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होता। दोषसिद्धि के लिए आरोपों का ठोस, विश्वसनीय और संदेह से परे साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध होना आवश्यक है। इस मामले में अभियोजन ऐसा करने में सफल नहीं रहा।

इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस निर्णय के साथ करीब 22 वर्षों से लंबित यह आपराधिक मुकदमा समाप्त हो गया।