चेक बाउंस मामले में राधेश्याम यादव को बड़ी राहत, अपीलीय अदालत ने दोषमुक्त किया

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रांची: वर्ष 2019 के एक पुराने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए राधेश्याम यादव को बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि जिन चेकों के आधार पर मामला दर्ज किया गया था, वे किसी वैध और कानूनी देनदारी के भुगतान के लिए जारी किए गए थे।

इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद राधेश्याम यादव को दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही शिकायतकर्ता को 3.5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया था। निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी की ओर से अपील दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद अपीलीय अदालत ने राहत प्रदान की।

मामला वर्ष 2019 का है। शिकायतकर्ता सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि मित्रतापूर्ण संबंधों के आधार पर राधेश्याम यादव ने उनसे तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। आरोप के अनुसार, इस राशि को लौटाने के लिए आरोपी ने तीन अलग-अलग चेक जारी किए थे। हालांकि, बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर सभी चेक “पेमेंट स्टॉप्ड बाय ड्रॉअर” के कारण अनादृत (डिशॉनर) हो गए थे। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा और भुगतान नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली।

अपील की सुनवाई के दौरान राधेश्याम यादव की ओर से दलील दी गई कि संबंधित चेक उन्होंने जमीन बिक्री से जुड़े एक अन्य लेन-देन के संदर्भ में किसी अन्य व्यक्ति को दिए थे, जिनका बाद में दुरुपयोग किया गया। आरोपी ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता के प्रति उनकी कोई वैध वित्तीय देनदारी नहीं थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी ने चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने से पहले ही संबंधित बैंकों को भुगतान रोकने के निर्देश दे दिए थे। इस परिस्थिति ने शिकायतकर्ता के दावों पर संदेह उत्पन्न किया। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि विवादित चेक किसी वैध और कानूनी देनदारी के निर्वहन के लिए जारी किए गए थे।

अदालत ने स्पष्ट किया कि चेक बाउंस के मामलों में दोषसिद्धि के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि संबंधित चेक किसी वैध कानूनी दायित्व के भुगतान हेतु जारी किए गए थे। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपी के खिलाफ दोषसिद्धि को बरकरार रखने का कोई आधार नहीं बनता।

सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा और मुआवजे के आदेश को निरस्त करते हुए राधेश्याम यादव को मामले में दोषमुक्त कर दिया। करीब सात वर्ष पुराने इस मामले में आए फैसले से आरोपी को बड़ी राहत मिली है।