आधी या एक-तिहाई सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा

Spread the love

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की विभिन्न जेलों में बंद उन कैदियों की रिहाई के मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाया है, जिन्होंने अपनी आधी या एक-तिहाई सजा पूरी कर ली है। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए सुझावों के आलोक में अपना पक्ष और विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से राज्य सरकार की रिपोर्ट पर लिखित जवाब और सुझाव अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह इन सुझावों पर विचार करते हुए अपना पक्ष प्रस्तुत करे, ताकि मामले के अंतिम निष्पादन की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को निर्धारित की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों के सुझाव और जवाब प्राप्त होने के बाद मामले में आगे का निर्णय लिया जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से पूर्व में दायर शपथ पत्र में बताया गया था कि झारखंड की विभिन्न जेलों में करीब एक हजार ऐसे कैदी हैं, जिन्होंने अपनी आधी या एक-तिहाई सजा पूरी कर ली है। नियमों के तहत ऐसे बंदियों के मामलों पर विचार किया जा सकता है।

यह सुनवाई सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी एवं अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर चल रही है। इससे पहले हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए ऐसे कैदियों के मामलों को राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर नियमानुसार विचार करने का निर्देश दिया था। मामले में राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पक्ष रखा। फिलहाल अदालत सरकार के विस्तृत जवाब और सुझावों का इंतजार कर रही है।