रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) का गठन वर्ष 2002 में संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत किया गया था। आयोग का उद्देश्य राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों की भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करना है। हालांकि, वर्षों से आयोग की विभिन्न परीक्षाएं अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों के कारण चर्चा में रही हैं।


छात्र नेता कुंदन राय ने प्रभात खबर से बातचीत में दावा किया कि पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट में हेरफेर, नंबर बढ़ाने, OMR बदलने और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे आरोप लगे थे। रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जांच CBI को सौंपी गई और तत्कालीन JPSC अध्यक्ष डॉ. दिलीप प्रसाद समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। (Prabhat Khabar)
इसके बाद तीसरी और चौथी परीक्षा की कट-ऑफ और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे। पांचवीं JPSC में OMR और प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद हुआ। छठी JPSC की मुख्य परीक्षा में भाषा के अर्हता पत्र के अंकों को मेरिट में जोड़ने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जून 2021 में हाईकोर्ट ने मेरिट सूची रद्द कर भाषा के अंक हटाकर नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। (Indian Kanoon)
सातवीं से 10वीं JPSC की प्रारंभिक परीक्षा में कुछ परीक्षा केंद्रों से क्रमांक वाले अभ्यर्थियों के चयन और OMR से जुड़े आरोपों के बाद भी विवाद हुआ। हाल के वर्षों में 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर CID जांच चल रही है। जांच के दौरान पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। अगस्त 2026 तक इस मामले में CID की ओर से 14 गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई थी। (The Times of India)
14वीं JPSC मामले में CID ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर निजी एजेंसी समेत कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जुलाई 2026 में आयोग ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा भी स्थगित कर दी थी। (The Times of India)
कुंदन राय ने भर्ती परीक्षाओं में कदाचार रोकने के लिए अलग कानून बनाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, प्रोफेसर एवं लेखिका फ़लक फ़ातिमा ने भी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के साथ व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता जताई।

