‘ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो, SIR रद्द करो’ के नारों से गूंजा साकची, जनांदोलन एकजुटता मंच के बैनर तले प्रदर्शन और जनसभा, चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल…

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जमशेदपुर:- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के विरोध में शनिवार शाम साकची स्थित बिरसा चौक गोलचक्कर पर जनांदोलन एकजुटता मंच के बैनर तले प्रदर्शन और जनसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान ‘ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो’ और ‘SIR रद्द करो’ समेत विभिन्न नारे लगाए गए। कार्यक्रम के दौरान लोगों के बीच पर्चों का भी वितरण किया गया।

सभा का संचालन मन्थन, सुमित राय, सुजय राय और डेमका सोय ने संयुक्त रूप से किया। रईस अफरीदी, मो. शाहिद, सुखचन्द्र झा, बैद्यनाथ प्रसाद, जगत और सोहन महतो समेत अन्य वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली से देश की चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर चुनाव आयोग के काम करने का आरोप लगाते हुए इसकी आलोचना की। हालांकि, ये आरोप आयोजकों और वक्ताओं की ओर से लगाए गए।

सभा में ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। वक्ताओं ने SIR की पूरी प्रक्रिया रद्द करने, SIR के आधार पर तैयार मतदाता सूची से कराए गए चुनावों की समीक्षा तथा जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके नाम पुनः जोड़कर पुरानी और संशोधित मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की मांग उठाई।

वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में स्वतः संज्ञान लेने तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी की। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की चयन समिति में स्वतंत्र प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जाना चाहिए।

‘लाखों मतदाताओं के नाम हटने की आशंका’ का दावा

कार्यक्रम के दौरान वितरित पर्चे में दावा किया गया कि SIR की प्रक्रिया के तहत देश में 10 प्रतिशत से अधिक आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। पर्चे में झारखंड में करीब 44 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा भी किया गया। साथ ही कहा गया कि ‘तार्किक विसंगति’ के आधार पर देशभर में बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।

आयोजकों का आरोप है कि झारखंड में मैपिंग नहीं होने और तार्किक विसंगति के आधार पर करीब 63 लाख मतदाताओं, यानी लगभग 28 प्रतिशत मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि इससे आदिवासी, मूलवासी, दलित, वंचित, भूमिहीन, अशिक्षित, महिला और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा बड़ी संख्या में नाम कटने की आशंका है।

पर्चे में चुनाव आयोग की तकनीकी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। आयोजकों ने दावा किया कि एक ऐसा सॉफ्टवेयर लागू किया गया है, जिसके जरिए दिल्ली से बैठकर किसी भी राज्य की मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की व्यवस्था संभव है। वक्ताओं ने कहा कि पहले नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में बूथ स्तर पर सत्यापन और ERO की भूमिका महत्वपूर्ण होती थी, जबकि वर्तमान व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

सभा में चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इससे चुनाव आयोग के अधिकारियों की जवाबदेही प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन की जरूरत है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सियाशरण शर्मा, राजश्री, लिलि शर्मा, रामकवीन्द्र सिंह, सुखचन्द्र झा, गणेश राम, रबीन्द्र प्रसाद, गौतम बोस, सपन दासगुप्ता, अंकुर शाश्वत, मो. शाहिद, अशोक शुभदर्शी, जयकिशोर, अजय मेहताब, मनोज गुप्ता, सुखवंत सिंह, विकास कुमार, उजागिर यादव और तौहीद्दुल हसन समेत अन्य लोगों की भूमिका रही।