पटमदा के कांकू गांव में प्रस्तावित स्टोन क्वारी का ग्रामीणों ने किया विरोध, डीसी को सौंपा ज्ञापन

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झारखंड: पटमदा प्रखंड की ओरिया पंचायत अंतर्गत कांकू गांव में प्रस्तावित स्टोन क्वारी के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को गांव के सैकड़ों महिला-पुरुषों ने जिला उपायुक्त को आवेदन सौंपकर खनन परियोजना की स्वीकृति प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि मौजा कांकू में लगभग 5.90 एकड़ भूमि पर स्टोन क्वारी स्थापित करने की तैयारी की जा रही है, जिसका ग्रामसभा में सर्वसम्मति से विरोध किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय उद्यान और आंगनबाड़ी केंद्र के समीप खदान का विरोध

ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित खदान स्थल के आसपास वर्ष 2023 में स्थापित अंतरराष्ट्रीय उद्यान, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीणों के आवासीय मकान और जाहेरथान स्थित हैं। ऐसे में खनन कार्य के दौरान होने वाले विस्फोट, धूल और प्रदूषण से बच्चों, महिलाओं एवं ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान की चिंता

ग्रामीणों ने आवेदन में कहा है कि स्टोन क्वारी शुरू होने से क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है तथा प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंच सकता है। उनका मानना है कि खनन गतिविधियों से गांव की शांतिपूर्ण जीवनशैली और आसपास के प्राकृतिक परिवेश पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से खारिज किया प्रस्ताव

ग्रामीणों ने बताया कि कांकू गांव अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां ग्रामसभा के निर्णय को विशेष महत्व प्राप्त है। ग्रामसभा की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित स्टोन क्वारी को किसी भी परिस्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी।

खनन स्वीकृति प्रक्रिया रोकने की मांग

ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की है कि ग्रामसभा के निर्णय और ग्रामीणों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित स्टोन क्वारी की स्वीकृति प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और आगे की सभी प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

इस संबंध में दिए गए आवेदन की प्रतिलिपि जिला खनन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी, पटमदा को भी भेजी गई है।

आवेदन पर ग्राम प्रधान मुचिराम मुर्मू, श्यामसुंदर बेसरा, सोमनाथ मुर्मू, गुरुपद मुर्मू, सगुन बेसरा और जगदीश मुर्मू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।