रामगढ़: रोजगार, परिवहन कार्य में हिस्सेदारी और लंबित मुआवजे की मांग को लेकर भुरकुंडा क्षेत्र में रैयत विस्थापितों का आंदोलन तेज हो गया है। रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने आउटसोर्सिंग परियोजना के कार्यस्थल पर प्रदर्शन करते हुए कंपनी का काम अनिश्चितकाल के लिए बंद करा दिया। प्रदर्शनकारियों ने ओवरबर्डन (ओबी) परिवहन भी रोक दिया, जिससे परियोजना का उत्पादन और परिवहन कार्य प्रभावित हो गया।


मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि परियोजना शुरू होने के बाद से प्रभावित परिवार रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण विस्थापितों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल रहे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित सहमति नहीं दी जाती, तब तक कंपनी का कार्य और परिवहन संचालन बंद रहेगा। उन्होंने कहा कि जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
विस्थापितों की प्रमुख मांगों में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार, स्थानीय सेल का संचालन विस्थापितों के माध्यम से, कोयला एवं ओबी परिवहन का ठेका स्थानीय विस्थापितों को देने तथा लंबित मुआवजा एवं पुनर्वास सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। फिलहाल इस मामले पर कंपनी प्रबंधन या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

